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दिल पर दर्द की शायरी—सीधे जज़्बातों से निकली हुई 💔

सुषमा जी प्राकृतिक आपदाओं और ऊर्जा संकट पर विचार करती हुई

दिल पर दर्द की शायरी—सीधे जज़्बातों से निकली हुई

1️⃣
दिल पर जो गुज़री है, उसे लफ़्ज़ों में कैसे कहें,
दर्द इतना है कि अब ख़ामोशी ही दवा लगती है।

2️⃣
दिल टूटा तो आवाज़ नहीं आई,
मगर दर्द ने हर धड़कन से सवाल कर लिया।

3️⃣
जिस दिल को उसके नाम किया था,
उसी दिल पर उसने सबसे गहरी चोट दी।

4️⃣
दिल संभाल कर रखा था हमने उम्र भर,
एक मुलाक़ात में उसने चकनाचूर कर दिया।

5️⃣
दिल का दर्द आँखों तक नहीं आने दिया,
वरना दुनिया पूछ बैठती—क्या हुआ है तुम्हें?

6️⃣
हर धड़कन गवाही देती है इस बात की,
दिल आज भी जख्मी है, बस रोना छोड़ दिया है।

7️⃣
दिल पर लगे ज़ख़्म दिखते नहीं,
मगर यही ज़ख़्म इंसान को अंदर से तोड़ देते हैं।

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