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अमेरिका-रूस-चीन में परमाणु हथियारों पर बातचीत, ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका रूस चीन के बीच परमाणु हथियारों के निरस्त्रीकरण पर बातचीत

परमाणु हथियारों पर दुनिया की बड़ी नजर: अमेरिका, रूस और चीन के बीच Denuclearization पर बातचीत का दावा

16 अक्टूबर 2026 | समय: 3:02 PM IST
Report By: Sushma

विशेष टिप्पणी: राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखंड भारत मंच (ABM)

अमेरिका, रूस और चीन के बीच परमाणु हथियारों पर बातचीत

दुनिया की तीन प्रमुख परमाणु शक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी यानी Denuclearization को लेकर बातचीत कर रहा है।

ट्रंप ने यह बात एक अमेरिकी मीडिया इंटरव्यू के दौरान कही। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत का उल्लेख किया है।

New START के समाप्त होने के बाद बढ़ी अहमियत

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली New START Treaty इस वर्ष समाप्त हो चुकी है।

2010 में हुए इस समझौते ने अमेरिका और रूस के strategic nuclear arsenals पर सीमाएं निर्धारित की थीं। बाद में इसे एक बार पांच वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।

अब इसके समाप्त होने के बाद वैश्विक स्तर पर भविष्य के nuclear arms-control framework को लेकर नई चर्चा की जरूरत महसूस की जा रही है।

रूस, अमेरिका और चीन क्यों हैं केंद्र में?

रूस, अमेरिका और चीन दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों में शामिल हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रूस के पास सबसे अधिक stored nuclear warheads हैं, उसके बाद अमेरिका और चीन का स्थान है। वहीं deployed nuclear warheads के मामले में अमेरिका की संख्या रूस से अधिक बताई जाती है।

इसी कारण इन तीनों देशों के बीच परमाणु हथियारों में कमी को लेकर किसी भी बातचीत का वैश्विक सुरक्षा पर व्यापक महत्व हो सकता है।

चीन की परमाणु क्षमता भी बनी महत्वपूर्ण मुद्दा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा है कि चीन आने वाले वर्षों में अमेरिकी परमाणु क्षमता के करीब पहुंच सकता है।

ऐसे में भविष्य के arms-control discussions में केवल अमेरिका और रूस ही नहीं, बल्कि चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन कथित बातचीत का औपचारिक स्वरूप क्या है, कौन से प्रस्ताव चर्चा में हैं और क्या तीनों देशों के बीच किसी नए समझौते की दिशा में वास्तविक प्रगति हुई है।

क्या नया Nuclear Agreement संभव है?

फिलहाल किसी नए परमाणु समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

इसलिए वर्तमान घटनाक्रम को बातचीत और संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखना अधिक उचित होगा, न कि किसी निश्चित nuclear deal के रूप में।

यदि भविष्य में अमेरिका, रूस और चीन परमाणु हथियारों की संख्या कम करने, transparency बढ़ाने और verification mechanisms पर सहमति बनाते हैं, तो इससे वैश्विक strategic stability को प्रभावित करने वाला नया framework तैयार हो सकता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति होने के साथ-साथ Strategic Autonomy को अपनी विदेश नीति का महत्वपूर्ण आधार मानता है।

अमेरिका, रूस और चीन के बीच nuclear balance में कोई भी बड़ा बदलाव एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए इसलिए जरूरी होगा कि वह इन घटनाक्रमों पर नजर रखते हुए अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, strategic preparedness और international partnerships को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखंड भारत मंच की विशेष टिप्पणी

राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखंड भारत मंच (ABM) के अनुसार, परमाणु युग में वास्तविक सुरक्षा केवल हथियारों की संख्या से निर्धारित नहीं होती।

परमाणु शक्तियों के बीच संवाद, जिम्मेदार व्यवहार, पारदर्शिता और प्रभावी verification भी वैश्विक शांति के महत्वपूर्ण आधार हैं।

दुनिया को ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें प्रत्येक देश की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान हो और साथ ही परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए बातचीत के रास्ते खुले रहें।

भारत के लिए शक्ति के साथ संयम, रणनीतिक तैयारी के साथ कूटनीति और राष्ट्रीय हितों के साथ वैश्विक शांति का संतुलन महत्वपूर्ण रहेगा।

Oasis News Analysis

अमेरिका द्वारा रूस और चीन के साथ Denuclearization पर बातचीत किए जाने की घोषणा ऐसे समय हुई है जब पुराना nuclear arms-control framework कमजोर हो चुका है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये बातचीत किस स्तर पर हैं और उनका कोई औपचारिक परिणाम निकलेगा या नहीं।

फिर भी, दुनिया की तीन प्रमुख परमाणु शक्तियों के बीच संवाद की संभावना अपने आप में महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या बातचीत केवल राजनीतिक बयान तक सीमित रहती है या इसके आधार पर कोई ठोस arms-control mechanism सामने आता है।

परमाणु शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य युद्ध को बढ़ाना नहीं, बल्कि युद्ध की संभावना को कम करना होना चाहिए।

Disclaimer

यह समाचार उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और संबंधित सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। Denuclearization संबंधी बातचीत के बारे में अभी किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

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