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इस भारी दुनिया में कोई भी हमारा ना हुआ, ग़ैर तो ग़ैर थे, अपनों का भी सहारा ना हुआ।

गहरा दर्द और तन्हाई झलकती शायरी, अकेलापन और जीवन का दर्द"

गहरा दर्द और तन्हाई झलकती हुई शायरी –

  • written by: Sushma / Oasis news
    Date & Time: 1st February 2026, 2.07 AM


1.
इस भारी दुनिया में कोई भी हमारा ना हुआ,
ग़ैर तो ग़ैर थे, अपनों का भी सहारा ना हुआ।
हर मोड़ पर तन्हाई ने हाथ थामा,
और हर खुशी का रास्ता वीरान सा हुआ।


2.
हर चेहरा लगता था अपना, पर कोई अपना ना रहा,
हँसी के पीछे छुपा हर आँसू हमने खुद सहा।
ग़ैरों में भी अपनापन था, अपनों में ही बेगानी,
इस दर्द की दुनिया में हर खुशबू फीकी सी रही।


3.
दुनिया ने सिखाया है हमें ये सबक,
कभी ग़ैरों से उम्मीद मत रखना।
अपनों ने भी छेड़ा जब यह खेल,
तब जाना हमने अकेले ही रहना।

Disclaimer:

यह शायरी केवल साहित्यिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रकाशित की गई है। इसमें व्यक्त विचार और भावनाएँ लेखक की निजी दृष्टि का प्रतिबिंब हैं। किसी भी मानसिक या भावनात्मक स्थिति के लिए यदि आपको सहायता की आवश्यकता हो, तो कृपया योग्य विशेषज्ञ या काउंसलर से संपर्क करें।

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प्रोफ़ाइल : डॉ. ए. अंगप्पन @ अरुण जी- एक प्रखर सनातन विचारधारा के युवा नेतृत्वकर्ता, कानूनी जागरूकता के सजग प्रहरी तथा राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक हैं।

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