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सब्र खो रहा हूं…’, ईरान पर ट्रंप ने कह दी बड़ी बात, क्या बड़े अटैक की है तैयारी?

ईरान से तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाए हैं. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अब वह ईरान के मामले में ज्यादा धैर्य नहीं रखने वाले. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका किसी बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर रहा है.

 

Fox News के कार्यक्रम में इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं अब ज्यादा सब्र नहीं रखने वाला हूं. उन्हें डील कर लेनी चाहिए.” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच पांच हफ्ते से ज्यादा पुराना सीजफायर बेहद कमजोर स्थिति में माना जा रहा है.

इंटरव्यू में ट्रंप से ईरान के संवर्धित यूरेनियम को वापस लेने की जरूरत पर भी सवाल पूछा गया. इस पर ट्रंप ने कहा कि यह मुद्दा सुरक्षा से ज्यादा “पब्लिक रिलेशन” का मामला है. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह जरूरी है, सिवाय पब्लिक रिलेशन के नजरिए से. हालांकि अगर वह मुझे मिल जाए तो मुझे अच्छा लगेगा.”

 

परमाणु को लेकर क्या है अमेरिका-ईरान का रुख?

 

राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है क्योंकि अमेरिका लगातार ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक को देश से बाहर भेजे और घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन बंद करे. दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि उसे परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT के तहत शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करने का अधिकार है.

तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने मंगलवार को कहा कि अगर ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो देश यूरेनियम को 90 प्रतिशत तक शुद्ध कर सकता है. 90 प्रतिशत संवर्धन को हथियार बनाने योग्य स्तर माना जाता है.

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों लोग विस्थापित हुए.

 

सीजफायर लागू लेकिन स्थायी समझौते नहीं

 

हालांकि फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी स्थायी समझौते के संकेत नहीं दिख रहे. अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध बढ़ रहा है.

 

मानवाधिकार संगठनों ने भी ट्रंप की भाषा और रणनीति की आलोचना की है. युद्ध के दौरान ट्रंप ने ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म करने और नागरिक ढांचे पर हमले जैसी चेतावनियां दी थीं. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई को “समुद्री डाकुओं जैसी” रणनीति तक बता दिया था. अब ट्रंप के ताजा बयान ने यह संकेत दे दिया है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी, तो वॉशिंगटन फिर से सख्त सैन्य कदम उठा सकता है.

 

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