Oasis News
E-Magazineइमोशनब्लॉगमनोरंजनशेर ए सायरी

पर्दानशीं दर्द है मेरा, लफ़्ज़ों में नहीं ढलता,

पर्दानशीं दिल था मेरा, शोर करना नहीं आया,
टूटकर भी मुस्कुराया, रोना ज़माने को नहीं आया।

पर्दे में रहकर भी सब देख लिया हमने,
किसने अपना कहा और किसने बस इस्तेमाल किया।

पर्दानशीं थे मेरे ख़्वाब, सबके सामने नहीं आए,
जो आए भी, वो तुम्हारी बेरुख़ी सह नहीं पाए।

दिल ने चाहा था चुपचाप निभाना हर रिश्ता,
पर्दा उठा तो मालूम हुआ, सबको तमाशा चाहिए था।

पर्दानशीं दर्द है मेरा, लफ़्ज़ों में नहीं ढलता,
बस आँखें नम हो जाती हैं, जब कोई अपना बदलता।

हमने एहसासों को हमेशा परदे में रखा,
वरना ये शहर तो हर जज़्बात को नीलाम करता है।

Related posts

इतिहास के पन्नो से – जानिए भगत सिंह के आदर्श कौन ?

oasisadmin

Tu khud ki khoj mein nikal – 1

oasisadmin

धुरंधर देखकर हैरान करण जौहर, बोले- खुद की काबिलियत पर हो रहा शक!

oasisadmin

Leave a Comment