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अमेरिका-ईरान युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल, इसराइल को क्या कई चीज़ें पता नहीं थीं?

भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच चल रही युद्धविराम वार्ता में पाकिस्तान की “मध्यस्थ” भूमिका पर संदेह जताया है.

रूवेन ने कहा है कि इसराइल पाकिस्तान को एक विश्वसनीय देश के रूप में नहीं देखता है.

इसराइली राजदूत ने कहा कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान की उपयोगिता के अपने कारण हो सकते हैं लेकिन इसराइल का मक़सद दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के आतंकी ढांचे को नष्ट करना है.

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच युद्धविराम की घोषणा की थी तो उसमें यह भी कहा था कि लेबनान पर भी कोई हमला नहीं होगा. लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लेबनान पर उसका सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा.

इस युद्धविराम में इसराइल और पाकिस्तान के बीच लेबनान को लेकर मतभेद पहले दिन ही उभरकर सामने आ गए थे.

ईरान लेबनान पर हमले को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है. इसराइल और पाकिस्तान में इस मतभेद के बीच रूवेन अज़ार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय देश के रूप में नहीं देखते हैं. मेरा मानना है कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया है.”

 

इसराइल का विपक्ष इस युद्धविराम को बड़े झटके के रूप में देख रहा है. वहाँ के विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि पूरे मामले में इसराइल को भरोसे में नहीं लिया गया.

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