भारत आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2047 में जब हमारा देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल एक विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनना चाहिए जो ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति, नैतिकता और मानवता के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करे।
इस महान लक्ष्य को प्राप्त करने की सबसे बड़ी शक्ति भारत के युवा हैं। आज देश की लगभग आधी आबादी युवा है। यदि यह युवा शक्ति सही दिशा, मजबूत संकल्प और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़े, तो विकसित भारत 2047 का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।
युवा संकल्प का अर्थ केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं है। इसका अर्थ है—अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए करना। आज आवश्यकता ऐसे युवाओं की है जो शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारी भी हों, जो रोजगार खोजने के साथ रोजगार पैदा करने की सोच रखें, जो तकनीक और नवाचार को अपनाएं तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें।
आत्मनिर्भर भारत, स्वच्छ भारत, डिजिटल भारत और विकसित भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों की सफलता तभी संभव है जब युवा इन अभियानों को अपना व्यक्तिगत दायित्व समझें। हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम जाति, भाषा, क्षेत्र और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करेंगे।
महान विचारक आचार्य चाणक्य ने कहा था कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति उसके जागरूक और चरित्रवान नागरिक होते हैं। वहीं स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को राष्ट्र की शक्ति बताते हुए कहा था—”उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
आज समय आ गया है कि भारत का प्रत्येक युवा यह संकल्प ले—
मैं शिक्षित बनूंगा,
मैं कौशल विकसित करूंगा,
मैं समाज की सेवा करूंगा,
मैं राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखूंगा,
और विकसित भारत 2047 के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाऊंगा।
आइए, हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं जो समृद्ध हो, आत्मनिर्भर हो, सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली हो और विश्व में सम्मान के साथ नेतृत्व करे।
युवा जागेगा, तभी भारत आगे बढ़ेगा।
युवा संकल्प ही विकसित भारत 2047 की सबसे मजबूत नींव है।
🇮🇳 जय हिंद!
🇮🇳 वंदे मातरम्!
— सुश्री सुषमा
संस्थापक एवं अध्यक्ष
अखंड भारत सेना

