आचार्य चाणक्य ने कहा था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक, शिक्षित और संगठित युवाओं में निहित होती है। वहीं स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था— *”उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”*
आज का भारत विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। ऐसे समय में देश के युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। केवल व्यक्तिगत सफलता ही पर्याप्त नहीं है; राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, चरित्र निर्माण, अनुशासन, सेवा और आत्मविश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं।
स्वामी विवेकानंद मानते थे कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण मजबूत चरित्र वाले युवाओं से होता है। चाणक्य का भी विश्वास था कि संगठित और राष्ट्रनिष्ठ युवा किसी भी देश को विश्व शक्ति बना सकते हैं।
आज आवश्यकता है कि युवा जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। ज्ञान अर्जित करें, कौशल विकसित करें, रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार सृजन का भी प्रयास करें और समाज के सकारात्मक परिवर्तन में अपनी भूमिका निभाएं।
अखंड भारत सेना का विश्वास है कि यदि भारत का युवा आत्मबल, राष्ट्रभक्ति और सेवा की भावना को अपने जीवन का आधार बना ले, तो भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।
आइए संकल्प लें—
**”हम केवल अपने भविष्य का निर्माण नहीं करेंगे, बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता भी बनेंगे।”**
वंदे मातरम्। 🇮🇳
जय हिंद।
— सुश्री सुषमा
अध्यक्ष
अखंड भारत सेना

