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ब्लॉगमनोरंजनशेर ए सायरी

अश्कों से भीगी चांदनी में जब हम खुद को देखते हैं तो वो मंजर आंखों में उभर आता है

अश्कों से भीगी चांदनी में जब हम खुद को देखते हैं तो वो मंजर आंखों में उभर आता है

ना तुम कभी कुछ कह पाए
ना हम कभी कुछ सुन पाए
एक उम्मीद में बिता दिया ये जीवन हमने
कभी तो तुम कुछ बोलोगे 
कभी तो हम कुछ सुनेंगे

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