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The Gold Story: तब चिदंबरम, जेटली और अब PM मोदी, सोने पर सरकार की अपील नई बात नहीं! देश के खजाने से संबंध समझ लें

Govt Appeals not to Buy Gold: भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक भावनात्‍मक जुड़ाव की चीज है. हालांकि जब-जब देश की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल छाए हैं, तब-तब देश की सरकार ने सोने के प्रति भारतीयों के मोह को कम करने की कोशिश की है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गहराते वैश्विक आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीयों से कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने की अपील (PM Modi Gold Appeal) की है. इस अपील के समर्थन और विरोध पर खूब चर्चा भी हो रही है. हालांकि, ये ऐसा कोई पहला मौका नहीं है.

साल 2013 में तत्‍कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ‘आर्थिक जिम्मेदारी’ के तौर पर और 2015 में अरुण जेटली ने डिजिटल गोल्ड के जरिए सोने के आयात को नियंत्रित करने की कोशिश की थी.

इन सभी अपीलों के पीछे एक ही सबसे बड़ा कारण रहा है- भारत का विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटा (CAD).

4 प्‍वाइंट में समझें- सरकारी खजाने से कैसे है सीधा संबंध

सोना खरीदने का सीधा संबंध हमारे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से होता है. इसे आसान कैलकुलेशन में समझने की कोशिश करते हैं.

. डॉलर में भारी खर्च

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है, लेकिन हम अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्‍सा आयात करते हैं. सोने के हर एक औंस (Ounce) का भुगतान हमें अमेरिकी डॉलर में करना पड़ता है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 72 बिलियन डॉलर के सोने का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24% अधिक है. भारत की कुल आयात सूची में सोना अकेले लगभग 10% की हिस्सेदारी रखता है.

 

2. चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव

जब हम निर्यात से कम कमाते हैं और आयात पर ज्यादा डॉलर खर्च करते हैं, तो ‘चालू खाता घाटा’ (CAD) बढ़ जाता है. IMF का अनुमान है कि 2026 में भारत का CAD बढ़कर 84.5 बिलियन डॉलर हो सकता है. सोने का 72 बिलियन डॉलर का आयात बिल इस घाटे की सबसे बड़ी वजह है.

. विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

अप्रैल 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 691 बिलियन डॉलर के आसपास आ गया है, जो कि फरवरी में 728 बिलियन डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया था. दूसरी ओर, ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं. चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88% तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर की प्राथमिकता तेल के लिए है, न कि सोने के लिए.

अगर सोने के आयात में 30-40% की गिरावट आती है, तो देश के 25 अरब डॉलर बचेंगे. यदि गिरावट 50% होती है, तो 36 अरब डॉलर की बचत होगी. और यदि एक साल तक पूरा देश ही सोना न खरीदे, तो पूरे 72 बिलियन डॉलर (लगभग 6.84 लाख करोड़ रुपये) बच सकते हैं. ये राशि भारत के अनुमानित CAD का आधा हिस्सा कवर कर सकती है और रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूती देगी.

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