नई दिल्ली: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ( BPCL ) के एचआर डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि अगर मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहता है तो खुदरा ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी होना शायद टाला न जा सके। यानी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने पॉलिसीमेकर्स के सामने तीन ऑप्शन रखे हैं। कारण है कि कच्चे तेल (क्रूड) के बाजारों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है
दुबे ने कहा, ‘अब हमारे पास दो या तीन विकल्प खुले हैं। पहला विकल्प है कीमतों में बढ़ोतरी। दूसरा, यह बढ़ोतरी सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखे या फिर पेट्रोलियम कंपनियां नुकसान खुद उठाएं और उनका घाटा बढ़ता जाए। तीसरा विकल्प है सरकार की ओर से घाटे की भरपाई के लिए फंड उपलब्ध कराया जाए यानी डेफिसिट फाइनेंसिंग।’
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में हुई 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को शुरू में टेम्परेरी माना गया था। लेकिन, जिस तरह से हालात सामने आ रहे हैं, लगता है कि यह सिलसिला अभी जारी रहेगा।
ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की ओर इशारा करते हुए दुबे बोले, ‘इसकी मरम्मत में ही काफी समय लग जाएगा। लिहाजा, मौजूदा हालात को देखते हुए अगर ये ऐसे ही बने रहते हैं तो मुझे लगता है कि कीमतों में एक और बढ़ोतरी होना तय है।’
हालांकि, अधिकारी ने यह नहीं बताया कि कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी। लेकिन उन्होंने कहा, ‘अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कीमतों में बढ़ोतरी होना निश्चित है।’
सप्लाई की सुरक्षा के मुद्दे पर राज कुमार दुबे ने कहा कि:
कूटनीतिक प्रयासों और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाई गई है।
इसकी वजह से ही भारत भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद इन झटकों से सुरक्षित रह पायाहै।
सप्लाई के स्रोतों में इजाफा
होर्मुज स्ट्रेट में 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल की आवाजाही रुक जाने के संदर्भ में दुबे ने कहा कि इस कमी को पूरा करना सिर्फ सप्लाई के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन लाकर ही संभव है। चाहे वह रूसी तेल हो या अफ्रीका से आने वाला तेल या फिर दुनिया के किसी अन्य हिस्से से आने वाला तेल।’

