6 February/ 5.00 pm / Delhi
Report: सुषमा
महाशिवरात्रि क्या है?
महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान शिव की आराधना और व्रत के रूप में मनाया जाता है।
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यह फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है।
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शिवरात्रि का अर्थ है “भगवान शिव की रात”, यानी इस रात भगवान शिव की विशेष पूजा और भक्ति की जाती है।
महाशिवरात्रि का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति और मानसिक संतुलन भी प्रदान करता है।
महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ समय
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तारीख: 15 फरवरी 2026 (रविवार)
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तिथि आरंभ: 15 फरवरी शाम 05:04 बजे
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तिथि समाप्त: 16 फरवरी शाम 05:34 बजे
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निशिता काल (सबसे शुभ पूजा समय): 11:55 PM – 12:56 AM
📌 भक्त आम तौर पर 15 फरवरी की रात को पूजा और जागरण करते हैं और अगले दिन 16 फरवरी को पारण (व्रत समाप्ति) करते हैं।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि केवल धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि यह भक्ति, संयम और ध्यान का प्रतीक भी है।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इस दिन संसार की रक्षा के लिए तांडव किया।
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यह दिन रात्रि जागरण, भजन और मंत्र जाप करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
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महाशिवरात्रि से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
शिवरात्रि पूजा विधि 2026
1. व्रत और उपवास
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दिनभर व्रत रखें।
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फलाहार या निर्जल व्रत करना शुभ माना जाता है।
2. रात्रि जागरण
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रातभर भगवान शिव का ध्यान, भजन और कीर्तन करें।
3. शिवलिंग पर अभिषेक
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दूध, दही, घी, शहद और जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
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अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
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रात्रि जागरण के दौरान ध्यान और मंत्र जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
महाशिवरात्रि मनाने के तरीके
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मंदिर दर्शन: नजदीकी शिव मंदिर में दर्शन और पूजा करें।
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घर पर पूजा: घर में शिवलिंग स्थापित कर अभिषेक और भजन करें।
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ध्यान और योग: रात्रि जागरण के दौरान ध्यान और योग करें।
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दान और सेवा: जरूरतमंदों की मदद करना पुण्य का कारण बनता है।
महाशिवरात्रि 2026 क्यों खास है?
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विशेष तिथि: 15 फरवरी 2026
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निशिता काल: 11:55 PM – 12:56 AM
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यह दिन ध्यान, संयम और भक्ति का संदेश देता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल जानकारी और धार्मिक संदर्भ के लिए लिखा गया है।
इसमें दी गई पूजा विधि, तिथियाँ और परंपराएँ व्यक्तिगत आस्था पर आधारित हैं।
किसी भी धार्मिक या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले संबंधित विशेषज्ञ या धर्मगुरु की सलाह अवश्य लें।

