डाटा और AI: नई अर्थव्यवस्था का आधार या चुनौती?
लखनऊ: डिजिटल अर्थव्यवस्था की तेज़ी से बढ़ती दुनिया में भारत में भी डाटा को आर्थिक विकास का आधार मानने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डाटा नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन चुका है और Artificial Intelligence (AI) ‘न्यू ऑयल’ की तरह भविष्य का सबसे बड़ा संसाधन बन सकता है। इसके साथ ही राज्य में “स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी” जैसी संरचनाएँ स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे नीति निर्माण और शासन में दक्षता बढ़ाने की उम्मीद है।
डाटा क्यों है अर्थव्यवस्था का आधार?
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आज डाटा केवल सूचना नहीं रहा, बल्कि यह व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक संसाधन बन चुका है।
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बड़ी कंपनियाँ अपने निर्णयों को डाटा‑बेस्ड बनाकर उत्पादन, विपणन और ग्राहक सेवा में सुधार कर रही हैं।
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डाटा के आधार पर AI सिस्टम विकसित होने से भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
AI को ‘न्यू ऑयल’ क्यों कहा जा रहा है?
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AI कंप्यूटर और मशीनों को बुद्धिमान बनाने वाली तकनीक है।
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आज यह स्वचालन, डेटा विश्लेषण, स्वास्थ्य निदान, खेती, स्मार्ट सिटी सहित कई क्षेत्रों में उपयोग हो रहा है।
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मुख्यमंत्री के अनुसार, AI और डाटा के संयोजन से शासन में भविष्यवाणी‑आधारित नीति निर्माण संभव है, जिससे नीतियाँ तेज़ और प्रभावी बनेंगी।
चुनौतियाँ और सवाल
हालांकि डाटा और AI के लाभ अनेक हैं, लेकिन इसके साथ महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठते हैं:
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क्या डाटा गोपनीयता और सुरक्षा पर्याप्त हैं?
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AI के विकसित होने से रोजगार पर असर पड़ सकता है?
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क्या यह तकनीक समान रूप से सभी वर्गों तक पहुँच पाएगी?
ये प्रश्न सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मुद्दों को भी दर्शाते हैं।
निष्कर्ष
डाटा और AI का सही उपयोग भारत की अर्थव्यवस्था को डिजिटल आधार पर मजबूत कर सकता है। परन्तु इसके लिए ज़रूरी है कि नीति‑निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और समाज मिलकर ऐसा ढांचा तैयार करें जो न्याय, जवाबदेही और समावेशन सुनिश्चित करे।
साक्षर, सुरक्षित और न्यायसंगत डिजिटल भविष्य तभी संभव है जब हम डाटा‑AI क्रांति को केवल अवसर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में भी स्वीकार करें।

