वो पानी की बूँद थी जो आँख से बही थी,
आंसू तो वो था,
जो आखों में रुक गया, उसने बस तड़प सही थी।
“हम रहेंगे खुश तेरे बिना भी।”
ये लिखने के लिए कलम उठाई,
रुक न पाए आखों में दबे आंसू,
और कम्बख़त कलम से पहले चल पड़े।
दिल मेरा जो अगर रोया न होता,
हमने भी आँखों को भिगोया न होता,
दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को,
ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता!
जो नजर से गुजर जाया करते हैं,
वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं,
कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते,
बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।

