पेपर लीक के बढ़ते मामलों और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों के मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी 6 जून को विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ। हाल ही CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश के सभी युवा ‘कॉकरोचों’ से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी। यह आंदोलन और प्रदर्शन शांतिपूर्वक तरीके से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ। इस बीच कुनिका सदानंद और अतुल कुलकर्णी ने भी देश के युवाओं से इस आंदोलन में शामिल होने और सवाल पूछने की अपील की। अतुल कुलकर्णी ने देश के युवाओं से इस बात के लिए माफी भी मांगी कि उनकी पीढ़ी ने उनके लिए चुनौतियों का अंबार छोड़ दिया और अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं।
कुनिका सदानंद ने अपने X अकाउंट पर लिखा, ‘कल लोकतंत्र दिवस है। कुछ लोगों के लिए, यह महज एक और राजनीतिक आयोजन हो सकता है। दूसरों के लिए, यह इस बात की याद दिलाता है कि भारत का भविष्य जागरूक नागरिकों पर निर्भर करता है, अंधभक्तों पर नहीं। नेता वादे कर सकते हैं, सरकारें घोषणाएं कर सकती हैं। लेकिन असल बदलाव कामों, जवाबदेही और परिणामों से मापा जाता है, भाषणों से नहीं।’
कुनिका ने आगे लिखा है, ‘एक मजबूत लोकतंत्र किसी एक पार्टी, नेता, विचारधारा, धर्म या समुदाय का नहीं होता। यह उन नागरिकों का होता है जो स्वतंत्र रूप से सोचते हैं, निडर होकर प्रश्न पूछते हैं, ईमानदारी से तथ्यों की खोज करते हैं और अपने आसपास हो रही घटनाओं से अवगत रहते हैं। लोकतंत्र बिना सोचे-समझे वफादारी से मजबूत नहीं होता। यह जागरूकता, भागीदारी और जवाबदेही से मजबूत होता है। कल एक महत्वपूर्ण दिन है। आइए ध्यान से देखें। आइए तार्किक रूप से सोचें। आइए प्रश्न पूछें और देखें कि अगला कदम क्या होता है।’
साथ में कुनिका सदानंद ने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वह बोल रही हैं, ‘मैं बात करने वाली हूं ऐसी मुहिम की, जो सोशल मीडिया पर शुरू हुई और आज उसकी चर्चा देश-विदेश में हो रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने उन मुद्दों को उठाया, जिनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। जब लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती है ना तो उन्हें ऐसे तरीके अपनाने पड़ते हैं ताकि अंधे और बहरे लोगों तक उनकी बात पहुंचे। मुझे आज बहुत गर्व है कि सारे छात्र बाहर निकलकर इसे सपोर्ट कर रहे हैं। इसका भविष्य में क्या होगा, ये तो नहीं पता, लेकिन इतना जरूर पता है कि इस कॉकरोच जनता पार्टी की वजह से लोगों के अंदर आवाज उठाने की हिम्मत आई है। आप बताइए आपको क्या लगता है कि पूरे सिस्टम को चेंज करना जरूरी है या सिर्फ लीडरशिप बदलने से काम हो जाएगा।’

