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नीट पेपर लीक से चर्चा में आया राजस्थान का सीकर कोचिंग का नया हब कैसे बन गया?

राजस्थान का सीकर ज़िला इन दिनों सुर्खियों में है.

नीट 2024 में देश में सबसे बेहतर परिणाम और टॉपर देने के बाद सीकर का नाम चर्चा में रहा.

नीट 2025 में भी सीकर ने टॉपर दिए. इन परिणामों ने सीकर को कोचिंग हब के रूप में नई पहचान दिलाई.

लेकिन सीकर का नाम अब नीट 2026 के पेपर लीक से जुड़ गया है.

परीक्षा से पहले ही नीट का पेपर हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों के नीट एस्पिरेंट्स तक पहुंच गया.

सीकर के पिपराली रोड और नवलगढ़ रोड पर साल 2020 तक कम ही बसावट हुआ करती थी.

लेकिन अब यहां बड़ी-बड़ी इमारतों में कोचिंग संस्थान और हॉस्टल बने हुए हैं.

सीकर के 81 साल के सेवानिवृत्त शिक्षक महावीर पुरोहित बीबीसी से सीकर के कोचिंग हब बनने के सफ़र को बताते हुए कहते हैं, ”सीकर में सबसे पहले सरकारी कल्याण कॉलेज और उसके बाद लॉ कॉलेज बना. 1990 के दशक के अंतिम सालों में एक स्थानीय शख्स़ ने कुछ स्टूडेंट्स को पढ़ाते हुए कोचिंग की शुरुआत की थी. इसके बाद बीते करीब दस साल में लगातार कोचिंग संस्थानों का बढ़ना शुरू होता गया. कोचिंग संस्थानों में बच्चों को टॉपर बनाने की होड़ मच गई.”

पिपराली रोड पर तीन हॉस्टल चलाने वाले जितेंद्र बाजिया बीबीसी से बताते हैं कि सीकर में करीब तीन हज़ार हॉस्टल हैं. घरों में भी पीजी चल रहे हैं.

वो कहते हैं, ”सीकर कोरोना के बाद कोचिंग हब के रूप में सामने आया है. सीकर में आज करीब सवा लाख कोचिंग स्टूडेंट नीट जेईई की तैयारी कर रहे हैं. देश के नामी कोचिंग संस्थानों के सेंटर संचालित हो रहे हैं.”

हॉस्टल संचालक और एक्स आर्मी मैन सुमेर सिंह भी मानते हैं कि कोरोना के बाद से अचानक ही कोचिंग संस्थानों की संख्या बढ़ने लगी. उनके मुताबिक करीब सवा लाख स्टूडेंट्स सीकर में जेईई और नीट की कोचिंग कर रहे हैं.

एक कोचिंग संस्थान में बीते दस साल से केमिस्ट्री पढ़ा रहे शिक्षक कृष्ण सुंडा बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, ”सीकर में अधिकतर कोचिंग संचालक कोटा से पढ़े हुए, आईआईएम-आईआईटी पास आउट हैं. यहां के कोचिंग संस्थानों से परिणाम बेहतर आने लगे, इस कारण राजस्थान के अन्य ज़िलों, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब समेत कई इलाकों से स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में सीकर आने लगे.”

वह मानते हैं कि बीते करीब आठ साल से सीकर कोचिंग हब की पहचान बनाने में कामयाब रहा है. सीकर में ग्रामीण परिवेश के बच्चों की संख्या ज़्यादा है.

सीकर में नीट एस्पिरेंट्स की संख्या को देखते हुए अब मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो रहे हैं. सीकर-जयपुर रोड पर एक बड़े निजी मेडिकल कॉलेज का काम तेजी से जारी है.

सीकर की एक कोचिंग के संचालक नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर आरोप लगाते हैं कि कोचिंग संस्थानों की आपसी प्रतिस्पर्धा भी पेपर लीक का एक कारण है.

हर कोचिंग संस्थान का परिणाम स्टूडेंट्स को प्रभावित करता है. यहां अधिक एडमिशन के लिए बेहतर परिणाम लाना ही एकमात्र उद्देश्य रहता है.

नीट परीक्षा होने के बाद भी किसी को भनक तक नहीं लगी कि पेपर लीक हुआ था.

सीकर के उद्योग नगर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि एक कोचिंग संस्थान में फिजिक्स के शिक्षक रमाकांत (बदला हुआ नाम) तीन मई की देर रात करीब डेढ़ बजे थाने आए थे.

थाने पर मौजूद ड्यूटी ऑफिसर को रमाकांत ने अपना फोन दिखाते हुए बताया था कि नीट का प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही आ गया था. जिसमें से लगभग डेढ़ सौ प्रश्न हूबहू परीक्षा में आए.

ड्यूटी ऑफिसर के लिखित में शिकायत मांगने पर रमाकांत एक सफेद पेपर लेकर चले गए. जिसके बाद फिर लौट कर थाने नहीं आए.

बीबीसी ने सीकर के उस कोचिंग संस्थान और रमाकांत से संपर्क करने का काफी प्रयास किया. लेकिन, संस्थान कुछ भी कहने से बच रहा है. जबकि,शिकायत करने वाले शिक्षक सुरक्षा कारणों से सामने नहीं आ रहे हैं.

 

पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो दिन बाद रमाकांत ने एनटीए को मेल कर परीक्षा पूर्व पेपर आने की शिकायत दी. जिसके बाद एनटीए ने इंटेलिजेंस और राजस्थान पुलिस से संपर्क किया.

 

वह बताते हैं कि जांच एजेंसी ने कोचिंग संचालकों, शिक्षकों, हॉस्टल संचालकों और स्टूडेंट्स समेत करीब डेढ़ सौ लोगों से पूछताछ की थी. कई को हिरासत में लिया गया था.

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