- पर्दे में छुपी आँखों ने, सब कुछ सह लिया,
आवाज़ नहीं निकली, पर दिल रोता ही रहा।
2.
पर्दानशीं नज़रों का भी एक अंजाम होता है,
जो बाहर मुस्कुराए, अंदर वही बदनाम होता है।
3.
आँखों पे पर्दा था, मगर आँसू बेगुनाह निकले,
हर सवाल के जवाब, इन्हीं की राह निकले।
4.
पर्दे में रहने की सज़ा आँखों ने पाई है,
हर ख़्वाब की कीमत, अश्कों में चुकाई है।
5.
नज़रों ने ओढ़ लिया पर्दा ज़माने के डर से,
दर्द फिर भी टपक गया, आँखों के घर से।
6.
पर्दानशीं आँखों में बसी है उदासी गहरी,
जो समझ गया इन्हें, वो चुप हो गया सहरी।
7.
आँखें ढकी रहीं, मगर कहानी खुलती गई,
हर एक ख़ामोशी, एक चीख बनती गई।

