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ब्लॉगमनोरंजनशेर ए सायरी

आँखों से बहा दर्द, लफ़्ज़ बन न सका,

आँखों पर दर्द भरी शायरी, जो दिल को छू जाए:

1.
आँखों ने कहा वो बात, जुबाँ कह न सकी,
ख़ामोशी में भी आज, तन्हाई रो पड़ी।

2.
मेरी आँखों में ठहरे हैं अधूरे से ख़्वाब,
नींद आती नहीं, दर्द सोने नहीं देता।

3.
आँखों से बहा दर्द, लफ़्ज़ बन न सका,
जो दिल में था मेरे, वो बयान न हो सका।

4.
देखा जो किसी ने मेरी आँखों की गहराई,
समझ जाता कि इसमें, कितनी तन्हाई समाई।

5.
हम मुस्कुरा तो देते हैं सबके सामने,
पर आँखें आज भी, सारा सच कह जाती हैं

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