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अमेरिकी दबाव बेअसर, भारत–ईरान साझेदारी अडिग

खामेनेई के करीबी ने दूर की चाबहार पोर्ट को लेकर भारत की चिंता**

तेहरान से आया भारत के लिए मजबूत संदेश

भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर ईरान से एक बड़ा और साफ संदेश सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी माने जाने वाले सालार वेलायतमदार (Salar Velayatmadar) ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच संबंध इतने मजबूत हैं कि कोई भी दुश्मन इनमें दरार नहीं डाल सकता

चाबहार पोर्ट पर भारत को मिला भरोसा

सालार वेलायतमदार ने भारत की चाबहार पोर्ट को लेकर चल रही चिंताओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि

“चाबहार पोर्ट परियोजना भारत और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग का प्रतीक है और इस पर किसी तीसरे देश के दबाव का कोई असर नहीं पड़ेगा।”

उन्होंने कहा कि चाबहार न केवल भारत और ईरान, बल्कि पूरे क्षेत्र के व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए अहम है।

ट्रंप को दिया ‘मुंहतोड़ जवाब’

यह बयान ऐसे समय आया है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वेलायतमदार ने कहा कि

“दबाव और धमकी की नीति से ईरान अपने मित्र देशों से रिश्ते नहीं तोड़ता।”

भारत–ईरान रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती

खामेनेई के करीबी नेता ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध

  • सभ्यता और संस्कृति

  • आपसी सम्मान

  • रणनीतिक सहयोग
    पर आधारित हैं।
    उन्होंने जोर देकर कहा कि ये रिश्ते किसी एक सरकार या वैश्विक दबाव पर निर्भर नहीं हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद सहयोग जारी

वेलायतमदार के मुताबिक, अमेरिका की प्रतिबंध नीति के बावजूद ईरान भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता देता रहेगा।
उन्होंने संकेत दिया कि ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत–ईरान साझेदारी आगे भी मजबूत होगी

भारत के लिए क्यों अहम है यह बयान?

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की ओर से आया यह बयान भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम है क्योंकि:

  • चाबहार पोर्ट भारत की मध्य एशिया तक पहुंच का प्रमुख रास्ता है

  • यह बयान भारत को रणनीतिक भरोसा देता है

  • वैश्विक दबाव के बीच भारत की स्थिति मजबूत होती है

निष्कर्ष

खामेनेई के करीबी सालार वेलायतमदार का बयान साफ करता है कि भारत–ईरान संबंध किसी भी बाहरी दबाव से ऊपर हैं। चाबहार पोर्ट को लेकर दी गई स्पष्टता और ट्रंप की टैरिफ नीति पर कड़ा रुख, दोनों देशों की रणनीतिक समझ को और मजबूत करता है।

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