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होर्मुज में ट्रंप की नाकाबंदी का ईरान ने निकाला तोड़, दूसरे बंदरगाहों का कर रहा इस्तेमाल

इस्लामाबाद में हुए शांति वार्ता के विफल होने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम का भविष्य फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित अहम समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टिक गया है. अमेरिका ने होर्मुज के पूर्व में ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकाबंदी लागू कर दी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने चेतावनी दी है कि ईरानी बंदरगाहों से होकर आ रहे किसी भी जहाज को रोका, या जब्त किया जा सकता है, चाहे वह किसी भी देश का हो.

अमेरिका ने होर्मुज की नाकाबंदी के लिए 15 से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान से आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नौसेना उसी तरह कार्रवाई करेगी, जैसे समुद्र में ड्रग तस्करों के खिलाफ की जाती है. उनका यह बयान वेनेजुएला तट पर अमेरिकी नौसेना द्वारा नौकाओं पर किए गए विवादास्पद हमलों के संदर्भ में था.

 

ट्रंप प्रशासन ने इन हमलों को ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ा था, जबकि वेनेजुएला ने इसे निर्दोष लोगों की हत्या बताया था. उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई. हालांकि अमेरिका ने कहा है कि मानवीय सहायता ले जाने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा.

ईरान इस नाकाबंदी से बचने के लिए कई रणनीतियां अपना रहा है. इसमें समुद्र में तेल का भंडारण (फ्लोटिंग स्टोरेज), शैडो फ्लीट (गुप्त टैंकरों) का इस्तेमाल और वैकल्पिक बंदरगाहों का उपयोग शामिल है. मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने पहले ही बड़ी मात्रा में तेल समुद्र में स्टोर कर लिया है. वर्तमान में लगभग 190 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में मौजूद है, जिससे चीन जैसे देशों की जरूरतें करीब 120 दिनों तक पूरी हो सकती हैं. यह नाकाबंदी उन सभी जहाजों को प्रभावित करती है जो ईरानी बंदरगाहों या तट से जुड़े हैं.

 

अमेरिका ने साफ किया है कि गैर-ईरानी जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन जो जहाज ईरान से जुड़े होंगे उन्हें रोका जा सकता है. हालांकि, यह कदम क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है. ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर नाकाबंदी जारी रही तो वह खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बना सकता है. अमेरिका की यह रणनीति या तो ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे बातचीत की मेज पर ला सकती है, या फिर हालात को सैन्य टकराव तक पहुंचा सकती है. अगर संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है.

 

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