बोलती निगाहों में छुपे दर्द को महसूस करती शायरी 💔👁️
1.
लब खामोश थे, मगर निगाहें सब कह गईं,
जो जुबाँ न बोल पाई, आँखें वो सह गईं।
2.
निगाहों ने बयान कर दी पूरी दास्ताँ,
होंठों पर मुस्कान थी, दिल था बेज़ुबाँ।
3.
बोलती निगाहों का दर्द समझता कौन है,
हर कोई चेहरे देखता है, दिल पढ़ता कौन है।
4.
आँखों में ठहर गया जो बरसों का दर्द,
एक पल की नज़र में टूट गया सब्र का फ़र्ज़।
5.
निगाहों ने पुकारा, मगर आवाज़ न मिली,
भीड़ में रहते हुए भी, कोई पहचान न मिली।
6.
हम चुप रहे तो लोग हमें बेदर्द समझ बैठे,
क्या खबर थी उन्हें, निगाहें रो-रो कर थक बैठे।

