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जीनत अमान की ज़िंदगी के खुलेंगे अनसुने राज, ऑटोबायोग्राफी में हर दर्द बयां करेंगी हिंदी सिनेमा की ‘बोल्ड क्वीन’?

जीनत अमान की ज़िंदगी के खुलेंगे अनसुने राज, ऑटोबायोग्राफी में हर दर्द बयां करेंगी हिंदी सिनेमा की ‘बोल्ड क्वीन’?

मुंबई।
70 और 80 के दशक में अपनी बोल्ड, ग्लैमरस और मॉडर्न छवि से हिंदी सिनेमा में नई पहचान बनाने वाली अभिनेत्री जीनत अमान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि उनकी प्रस्तावित ऑटोबायोग्राफी है, जिसमें वह अपनी ज़िंदगी से जुड़े अनकहे सच और गहरे दर्द को दुनिया के सामने रखने वाली हैं।

जीनत अमान ने उस दौर में बॉलीवुड में कदम रखा, जब अभिनेत्रियों के लिए सीमित भूमिकाएँ हुआ करती थीं। उन्होंने अपनी अलग सोच, आत्मविश्वास और साहसी किरदारों के ज़रिये हिंदी सिनेमा की पारंपरिक छवि को तोड़ा। 1970 में मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद, उन्हें देव आनंद की फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ से बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक मिला, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।

इसके बाद जीनत अमान ने ‘डॉन’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘यादों की बारात’, ‘कुर्बानी’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया और अपने अभिनय के साथ-साथ स्टाइल और स्क्रीन प्रेज़ेंस से दर्शकों का दिल जीता। उन्हें हिंदी सिनेमा की पहली मॉडर्न और बोल्ड हीरोइन के तौर पर देखा गया।

हालांकि, जितनी चमकदार उनकी प्रोफेशनल ज़िंदगी रही, उतनी ही उतार-चढ़ाव भरी उनकी निजी ज़िंदगी भी रही। जीनत अमान का नाम समय-समय पर कई दिग्गज सितारों के साथ जुड़ा, जिनमें राज कपूर और इमरान खान जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन अभिनेता और निर्देशक संजय खान के साथ उनका रिश्ता उनकी ज़िंदगी का सबसे दर्दनाक और विवादित अध्याय माना जाता है।

बताया जाता है कि इस रिश्ते ने जीनत अमान को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से गहरा आघात पहुँचाया। वर्षों तक उन्होंने इस दर्द को खामोशी के साथ सहा और सार्वजनिक रूप से इस पर बहुत कम बात की। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी ऑटोबायोग्राफी में इस रिश्ते से जुड़े कई अनसुने सच सामने आ सकते हैं।

जीनत अमान की ज़िंदगी से जुड़े ऐसे कई किस्से हैं, जिनसे दुनिया अब तक अनजान रही है। फैंस को उम्मीद है कि उनकी आत्मकथा में न सिर्फ उनके फिल्मी सफर की कहानी होगी, बल्कि उस दौर में एक महिला कलाकार के संघर्ष, अकेलेपन और दर्द को भी बेबाकी से सामने रखा जाएगा।

अगर ऐसा होता है, तो जीनत अमान की यह ऑटोबायोग्राफी न सिर्फ उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि हिंदी सिनेमा के इतिहास में भी एक अहम दस्तावेज साबित हो सकती है।

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