चिलमन पर दर्द भरे दिल की शायरी पेश है:
चिलमन के पीछे छुपा रखा है दर्द-ए-दिल हमने,
वरना महफ़िल में मुस्कुराने का हुनर रखते हैं हम।
चिलमन हटा दूँ तो ज़ख़्मों का शहर नज़र आए,
इसलिए ख़ामोशी ओढ़कर जीना सीख लिया है हमनें।
दर्द इतना है कि आँसू भी इजाज़त नहीं माँगते,
चिलमन गिरती है तो बस ख़ामोशी बोल जाती है।
चिलमन के उस पार भी दिल रोता ही रहता है,
फर्क़ बस इतना है—दुनिया देख नहीं पाती।

