ढाका: बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने गुरुवार को एक इंटरव्यू में कहा है कि बांग्लादेश ‘अपने हितों और ग्लोबल इकॉनमी और व्यापार में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए मक्का समझौते में शामिल होने पर विचार कर सकता है।’ इस बयान ने ढाका और नई दिल्ली के बीच चल रहे तनाव में एक और पहलू जोड़ दिया है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने इस महीने की 7 तारीख को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत वे औपचारिक रूप से इस बात के लिए सहमत हुए कि ‘तीनों देशों में से किसी एक पर भी होने वाले सशस्त्र हमले को वे सभी पर हमला मानेंगे’। हुमायूं कबीर ने इसके अलावा तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कहा कि अभी यात्रा करने का ‘सही समय नहीं है।’
ढाका इस्लामाबाद के साथ भी संबंध मजबूत कर रहा है खासकर व्यापार और लोगों के बीच आपसी संपर्क के मामले में। कबीर ने इसे सामान्य राजनयिक जुड़ाव बताया। कबीर ने कहा कि चीन के साथ संबंध ‘नई ऊंचाई’ पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भू-राजनीतिक दबाव से बचते हुए बीजिंग के साथ गहरे संबंध बनाना चाहता है। उन्होंने दोनों देशों के ‘टू प्लस टू’ मैकेनिज्म और व्यापक साझेदारी की ओर इशारा किया।
तारिक रहमान के भारत दौरे की संभावनाओं पर बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा ‘भारत की द्विपक्षीय यात्रा की संभावना कम है। राष्ट्रीय हित से हटकर किसी उच्च-स्तरीय यात्रा की जल्दबाजी करने का कोई औचित्य नहीं है।’ ढाका में राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दिप्रिंट ने बताहै कि आने वाले महीनों में रहमान की द्विपक्षीय यात्रा की संभावना कम है जब तक कि भारत उस कदम से आगे न बढ़े जिसे उन्होंने ‘प्रतीकात्मक पहल’ बताया था।
बांग्लादेशी अखबार ‘द बिजनेस स्टैंडर्ड’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा ‘पड़ोसी देश को बांग्लादेश में जुलाई के जन-विद्रोह की वास्तविकता को ठीक से समझना चाहिए जो 1,500 से अधिक लोगों के बलिदान से हुआ था।’ विवाद का एक मुख्य कारण हसीना बनी हुई हैं जो विद्रोह के बाद भारत भाग गई थीं। कबीर ने नई दिल्ली की कड़ी आलोचना की कि उसने शेख हसीना को राजनीतिक और मीडिया गतिविधियों के लिए भारतीय क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति दी।

