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फेलियर कैसे हुआ’, NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछे सख्त सवाल

NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सख्त सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि हाई पावर्ड कमेटी और सिफारिशों के बावजूद पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई. केंद्र सरकार और NTA की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि नई व्यवस्था लागू की गई है और 21 जून की परीक्षा की निगरानी उच्च स्तर पर की जाएगी.

NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि जब पहले से हाई पावर्ड कमेटी बनाई गई थी और कई सिफारिशें लागू की जा चुकी थीं, तब भी ऐसी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व इसरो चेयरमैन की अगुवाई वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट और जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया है. इसके बाद जस्टिस नरसिम्हा ने सवाल उठाते हुए कहा कि इम्प्लीमेंटेशन की कितनी निगरानी हुई थी और यह फेलियर आखिर कैसे हुआ.

कोर्ट ने कहा कि अगर हाई पावर्ड कमेटी बनने के बाद भी पेपर लीक जैसी घटना सामने आई है, तो इसका मतलब या तो मूल सिफारिशों में कोई कमी थी या फिर उन्हें ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया. सुनवाई के दौरान इसरो के पूर्व अध्यक्ष राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि कमेटी ने लॉन्ग टर्म के लिए 35 और शॉर्ट टर्म के लिए 60 सिफारिशें दी थीं. उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर सुझावों को लागू भी कर दिया गया है.

राधाकृष्णन ने कहा कि कमेटी ने NTA को और मजबूत बनाने की सलाह दी थी. उन्होंने माना कि मामला क्वेश्चन पेपर से छेड़छाड़ का था, लेकिन कई सुधार लागू किए जा चुके हैं. उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अगले महीने होने वाली reNEET परीक्षा में इन सभी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान साफ कहा कि जब तक असली जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ यह जानने का मामला नहीं है कि कौन जिम्मेदार है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि जिम्मेदारी आखिर किसके कंधों पर थी और किसने अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं निभाई.

कोर्ट ने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक सिस्टम की असली कमजोरी सामने नहीं आएगी. अदालत ने इसे पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बताया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि सरकार युवाओं के साथ खड़ी है और इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित भी सरकार ही है. उन्होंने कहा कि 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए नया मैकेनिज्म तैयार किया गया है और इसकी निगरानी सबसे ऊंचे स्तर पर की जा रही है

21 जून की परीक्षा के लिए हाई लेवल मॉनिटरिंग का दावा

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान UPSC का उदाहरण भी दिया. कोर्ट ने कहा कि UPSC में कभी ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली और NTA को उससे सीखने की जरूरत है. अब इस मामले में सभी की नजरें आने वाली परीक्षाओं और नई व्यवस्था के परिणाम पर टिकी हुई हैं. छात्रों और अभिभावकों के बीच भी परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है.

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