नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद, दूसरे राज्यों से शहर में आने वाले सभी कमर्शियल वाहनों के लिए पर्यावरण मुआवजा शुल्क बढ़ा दिया है। बढ़ी हुई दरें उन लगातार प्रयासों का हिस्सा हैं जिनका मकसद प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को दिल्ली में आने से रोकना है। इस कदम का मकसद डीजल से चलने वाले कमर्शियल व्हीकल को दिल्ली में घुसने के बजाय पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर चलने के लिए मजबूर करना भी है। ग्रीन सेस के बाद दिल्ली आने वाली गाड़ियों के टोल में इजाफा हुआ है।
पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ECC) लगने के बाद टोल कीमतों में कितना बदलाव हुआ, जानिए:
कैटेगरी 2 के वाहनों (हल्के वाहन) और कैटेगरी 3 के वाहनों (दो-एक्सल वाले ट्रक) के लिए ECC को 1,400 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है।
भारी वाहनों- कैटेगरी 4 (तीन-एक्सल वाले ट्रक) और कैटेगरी 5 (चार-एक्सल वाले ट्रक और उससे ऊपर) के लिए टोल 2,600 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लिया गया फैसला
यह कदम MC मेहता बनाम भारत संघ के लंबे समय से चल रहे मामले में शीर्ष अदालत के 12 मार्च के आदेश के बाद उठाया गया है। इसमें राष्ट्रीय राजधानी में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ECC दरों में बढ़ोतरी अनिवार्य की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए निर्देश दिया कि संशोधित ECC दरें 1 अप्रैल से लागू की जाएं और उसी तारीख से 5 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी की भी अनुमति दी।
एक अधिकारी ने टीओआई को बताया कि नगर निकाय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू कर रहा है, साथ ही RFID इंटीग्रेशन जैसे तकनीकी सुधार भी कर रहा है। अदालत ने MCD को अपने टोल ढांचे को तर्कसंगत बनाने और एक व्यापक ट्रैफिक अध्ययन करने का भी निर्देश दिया। साथ ही उसे बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ समन्वय में काम करने को कहा, जिसमें जरूरत पड़ने पर टोल प्लाजा को स्थानांतरित करना भी शामिल है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जो भारी वाहन जरूरी सामान नहीं ले जा रहे हैं, उन्हें शहर में आने से बचना चाहिए

