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चाबहार बंदरगाह की रणनीतिक अहमियत-

चाबहार बंदरगाह की रणनीतिक अहमियत

ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग उपलब्ध कराता है, जिससे भारत को पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वर्षों से पाकिस्तान द्वारा जमीनी मार्ग की अनुमति न दिए जाने के कारण भारत-अफगान व्यापार बाधित रहा है, ऐसे में चाबहार एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है।

चाबहार बंदरगाह के माध्यम से भारत ईरान के रास्ते अफगानिस्तान तक सामान पहुंचा सकता है और वहां से उज़्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाखस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों से सीधा व्यापार कर सकता है। यह मार्ग इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से भी जुड़ता है, जिससे भारत को रूस और यूरोप तक कम लागत और कम समय में व्यापार का अवसर मिलता है।

रणनीतिक रूप से यह बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के संतुलन के तौर पर भी देखा जाता है। चाबहार न केवल भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करता है, बल्कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार बंदरगाह भारत की “कनेक्ट सेंट्रल एशिया” नीति का अहम स्तंभ है और यह आने वाले वर्षों में भारत-ईरान-मध्य एशिया व्यापार को नई दिशा दे सकता है।

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