ईरान जंग से जुड़ी अबतक की सबसे बड़ी खबर आई है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने का ऐलान कर दिया है. ईरान ने कहा है कि इजरायल-लेबनान सीजफायर के बाद होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोल दिया गया है. इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया था. इसके बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई थी.
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि लेबनान में संघर्ष-विराम के मद्देनज़र होर्मुज़ स्ट्रेट से सभी कमर्शियल जहाज़ों के गुज़रने का मार्ग पूरी तरह से खुला घोषित किया गया है. अराघची ने यह भी कहा कि होर्मुज को संघर्षविराम की शेष अवधि के लिए ही खोला गया है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर लिखा,”लेबनान में संघर्ष-विराम के अनुरूप होर्मुज स्ट्रेट से सभी वाणिज्यिक जहाज़ों के गुज़रने का मार्ग, संघर्ष-विराम की शेष अवधि के लिए, पूरी तरह से खुला घोषित किया गया है; यह मार्ग उसी समन्वित मार्ग पर स्थित है जिसकी घोषणा ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है.”
ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने पहली बार 28 फरवरी 2026 को ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया था. इसी दिन से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी. कुछ ही दिन बाद होर्मुज को ईरान ने पूरी तरह से बंद कर दिया था. इस तरह से अगर 28 फरवरी 2026 से लेकर 17 अप्रैल 2026 तक देखा जाए तो 49 दिन के बाद होर्मुज को ईरान ने पूरी तरह से खोला है.
बता दें कि अमेरिका ने भी होर्मुज समेत ईरान के दूसरे बंदरगाहों पर नाकेबंदी का ऐलान कर रखा था. माना जा रहा है कि अब अगला कदम अमेरिका उठाएगा.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत में भी रसोई गैस की किल्लत पैदा हो गई थी. भारत का LPG कतर समेत गल्फ के दूसरे देशों से इसी रास्ते से आता था. इस मार्ग के बंद होने से भारत एलपीजी के लिए दूसरे विक्रेताओं के पास जाना पड़ा. इसके अलावा कुछ जहाजों को ईरान की सहमति के बाद नेवी की निगरानी में होर्मुज से भारत लाना पड़ा.

