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इमोशनशेर ए सायरी

अनमोल बूँदें

प्रकृति माँ के स्पष्ट संदेश के साथ, ये अनमोल बूँदें तेज़ी से एक मस्ती से भरा, प्रेम से भरा जीवन जीती हैं, और फिर अपने जीवन का अंत कर लेती हैं। एक पल से भी कम समय में, बारिश का जन्म होता है और धरती को छूते ही वह एक अलग आयाम ले लेती है।

बारिश का नाम सुनते ही दिल में अजीब सी खुशी और पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं, है ना? खिड़की पर गिरती बूंदों की आवाज़ या ठंडी हवा का झोंका, ये सब मिलकर दिल को एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। Barish Shayari इन्हीं एहसासों को अल्फाज़ देती है। ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उन अनगिनत दिलों की धड़कनें हैं, जो बारिश के हर कतरे में अपनी कहानियां ढूंढते हैं। तो चलिए, चाय का कप उठाइए और बारिश की इन शायरियों की जादुई दुनिया में डूब जाइए।

बारिश शायरी

बारिश में अक्सर लोग छाता खोल लेते हैं,
मगर कुछ लोग ऐसे ही भीगना पसंद करते हैं।
शायद उन्हें भी पता है,
कि कुछ दर्द सिर्फ़ बारिश ही धो सकती है।

देखो, बादल कैसे बरस रहे हैं,
जैसे कोई दिल अपनी कहानी सुना रहा हो।

ये सिर्फ़ पानी नहीं, ये आँसुओं की धारा है,
जो हर ज़ख़्म को धोकर, दिल को साफ़ कर रहा हो।

ठंडी हवा के झोंके, बारिश की फुहारें,
कैसे रोकें खुद को, जब यादें पुकारें।

बादलों की हलचल ने कुछ यादें जगा दीं,
तेरी हँसी की गूँज फिर से हवा में सजा दी।
गरजते बादल, बरसती बूँदें, ये कैसा समाँ है,
जैसे आसमाँ भी आज खुशियों से भर गया है।
हर कतरा पानी का एक नई कहानी कह रहा है,
तेरे प्यार में आज मेरा दिल बहक रहा है।

 

बारिश से ज़्यादा तासीर है तेरी यादों मे
हम अक्सर बंद कमरे मे भी भीग जाते हैं !!

कभी भीगते थे संग तेरे हम सावन की रिमझिम बारिश में
आज अकेला ही भीगता हूँ मैं अपने आंसुओं की बारिश में !!

किस मुँह से इल्ज़ाम लगाएं बारिश की बौछारों पर
हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी मिट्टी की दीवारों पर !!

बारिश का मौसम मुझे इसीलिए भाता है
अंदर और बाहर का मौसम एक सा हो जाता है !!

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था !!

मासूम मोहब्बत का बस इतना फसाना है
कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है !!

कोई रंग नहीं होता बारिश के पानी में
फिर भी फ़िज़ा को रंगीन बना देता है !!

ये बारिश का मौसम और तुम्हारी याद
चलो फिर मिलते हैं एक कप चाय के साथ !!

खुद भी रोता है मुझे भी रुला देता है
ये बारिश का मौसम उसकी याद दिला देता है !!

कोई तो बारिश ऐसी हो जो तेरे साथ बरसे
तन्हा तो मेरी ऑंखें हर रोज़ बरसाती है !!

सारे इत्रों की खुशबू आज मन्द पड़ गयी
मिट्टी में बारिश की बूंदे जो चंद पड़ गयी !!

हवा भी रूक जाती है कहने को कुछ तराने
बारिश की बूंदे भी उसे छूने को करती है बहाने !!

कोई इस तरह भी वाकिफ हो मेरी जिंदगी से
की मैं बारिश में भी रोऊँ और वो मेरे आँसूं पढ़ ले !!

सांस बन कर तुम मेरे दिल में समा जाते हो
जब भी तुम्हे याद करता हूं बरसात बन के आ जाते हो !!

कभी बेपनाह बरस पडी कभी गुम सी है
यह बारिश भी कुछ कुछ तुम सी है !!

पहले बारिश होती थी तो याद आते थे
अब जब याद आते हो बारिश होती है !!

 

किस मुँह से इल्ज़ाम लगाएं बारिश की बौछारों पर
हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी मिट्टी की दीवारों पर !!

बारिश का मौसम मुझे इसीलिए भाता है
अंदर और बाहर का मौसम एक सा हो जाता है !!

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था !!

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