बीजेपी वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद का मीडिया बयान – मुख्य बिंदु
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद श्री रवि शंकर प्रसाद ने आज शुक्रवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच को रोकने का गंभीर आरोप लगाया।
श्री प्रसाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने ईडी अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच को जबरन रोकने की कोशिश की, जिस मामले की सुनवाई कल सर्वोच्च न्यायालय में हुई। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में I-PAC कंपनी के पास से लगभग ₹20 करोड़ की संदिग्ध राशि के ठोस सबूत मिले हैं, जिनकी जांच आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि यह मामला लगभग ₹3,000 करोड़ के कोयला घोटाले से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर कोयले की तस्करी और हवाला के माध्यम से पैसे को विदेशों में भेजने की बात सामने आई है। श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली।
उन्होंने कहा कि घटनास्थल से जो दृश्य सामने आए, वे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वीडियो फुटेज में देखा गया कि पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पीछे-पीछे फाइलें लेकर दौड़ते नजर आए, जो अत्यंत असामान्य और चिंताजनक है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने आगे कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को बलपूर्वक रोकने का प्रयास एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से कई गंभीर प्रश्न उठते हैं।
श्री प्रसाद ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने खुली अदालत में स्पष्ट किया कि कोयला घोटाले से जुड़े ₹20 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत I-PAC कंपनी से मिले हैं, इसी कारण जांच जरूरी थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में अन्य कई स्थानों पर भी तलाशी की जानी थी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हुआ यह ₹3,000 करोड़ का कोयला घोटाला बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का उदाहरण है। कोयले की तस्करी बंगाल से बाहर की जाती है और उससे प्राप्त धन को हवाला मार्गों के माध्यम से वापस लाकर सफेद किया जाता है।
श्री प्रसाद ने कहा कि वे स्वयं पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री रह चुके हैं, इसलिए उन्हें पश्चिम बंगाल के कोयला खदानों की कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के शासन में यह घोटाला बेहद गंभीर रूप ले चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि राज्य का प्रशासन सरकार के नियंत्रण में है, इसलिए जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए था। लेकिन मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पहुंचना, हरे रंग की फाइल लेकर वहां से जाना, और उनके पीछे कोलकाता पुलिस के अधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दौड़ते हुए दिखाई देना, पूरे घटनाक्रम को हास्यास्पद और चिंताजनक बनाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर भी मुख्यमंत्री की सहायता के लिए मौजूद थे, जो जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

