Oasis News
DelhiE PaperE-Magazineअवॉर्ड्सखेल जगतचुनावनेशनलपॉलिटिक्सफेमस पर्सनेलिटीब्लॉगमनोरंजनराजनीति वार्तालेटेस्ट न्यूज

Ms. Sushma Profile-

Sushma– यह नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि आत्मबल, स्वाभिमान और निरंतर संघर्ष की जीवंत कहानी है। जीवन की राह कभी सरल नहीं रही, लेकिन हर कठिन मोड़ पर हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का संकल्प और अधिक दृढ़ होता गया। शिकायतों से दूर रहकर, केवल अपनी मेहनत, ईमानदारी और आत्मविश्वास को ही सहारा बनाया गया। परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी रहीं, भीतर का विश्वास कभी डगमगायानहीं।

“जो हालातों से लड़ना सीख ले,
वही अपनी तक़दीर खुद लिखता है।”

नेतृत्व यहाँ किसी पद या ओहदे का मोहताज नहीं रहा। यह स्वभाव में रचा-बसा गुण है—साथ चलने वालों को समझना, उनकी क्षमताओं को पहचानना, उन्हें सही दिशा देना और आवश्यकता पड़ने पर ढाल बनकर उनके साथ खड़ा रहना। निर्णयों में दृढ़ता है, लेकिन उस दृढ़ता में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टि भी समान रूप से मौजूद है।

“सच्चा नेता वही होता है,
जो भीड़ के आगे नहीं,
भीड़ के साथ चलता है।”

       

प्रशासनिक दृष्टि अनुशासन, धैर्य और दूरदृष्टि से संचालित रही। सीमित साधनों और अनेक चुनौतियों के बीच एक मजबूत संगठन की नींव रखी गई, जो आगे चलकर Oasis Group के रूप में स्थापित हुआ। यह निर्माण किसी शोर-शराबे या दिखावे का परिणाम नहीं, बल्कि खामोश परिश्रम, स्पष्ट सोच और निरंतर कर्म का सजीव उदाहरण है।

“शोर से नहीं,
नींव की मजबूती से
इमारतें खड़ी होती हैं।”

भीतर का कलाकार हर भूमिका में संवेदनशीलता और रचनात्मकता घोल देता है। यही दृष्टि कार्यों को केवल औपचारिक नहीं रहने देती, बल्कि उन्हें अर्थ, आत्मा और उद्देश्य प्रदान करती है। समाजसेवा यहाँ कोई दायित्व नहीं, बल्कि स्वभाव है—जहाँ भी आवश्यकता दिखाई दी, सहायता अपने आप आगे बढ़ी।

  

“जिस दिल में इंसानियत ज़िंदा हो,
वहाँ सेवा अपने आप जन्म लेती है।”

एक आदर्श शिक्षक के रूप में भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही। शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, संस्कार और सही दिशा का बीज बोया गया। अनेक बच्चों के जीवन को सही मार्ग मिला, उनके सपनों को उड़ान मिली और उनके भविष्य को एक ठोस आकार मिला।

“शिक्षक वह नहीं जो सिर्फ पढ़ाए,
शिक्षक वह है जो जीवन गढ़े।”

एक खिलाड़ी के रूप में खेल को हमेशा खेल की भावना से खेला गया। जीत-हार से ऊपर अनुशासन, धैर्य और खेल भावना को रखा गया। मैदान में संघर्ष करना, नियमों का सम्मान करना और हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना—यही खेल का वास्तविक अर्थ माना गया।

“खेल जीतने से नहीं,
चरित्र गढ़ने से महान बनाता है।”

आध्यात्मिक यात्रा भी उतनी ही गहरी और सच्ची रही। एक स्पिरिचुअल हीलर के रूप में अनेक लोगों को आत्मिक शांति, सकारात्मकता और भीतर की शक्ति से जोड़ा गया। एकांत-वास, आत्मचिंतन और साधना के माध्यम से यह समझ विकसित हुई कि ईश्वर हर प्राणी में विद्यमान है। इसी दृष्टि ने सबको साथ लेकर चलने की भावना को और सशक्त बनाया।

“जो हर प्राणी में ईश्वर देख ले,
उसका जीवन ही साधना बन जाता है।”

पत्रकारिता में सत्य और साहस सर्वोपरि रहे। सच्ची और सही खबर सामने लाना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य माना गया। दबाव, डर या प्रलोभन कभी सच के मार्ग में बाधा नहीं बने।

“सच अगर साथ हो,
तो अकेलापन भी ताकत बन जाता है।”

स्वाभिमान इस पूरी यात्रा की रीढ़ रहा। जीवन ने कई बार गिराया, कई बार परखा, लेकिन बिखरने का अवसर कभी नहीं दिया गया। हर चोट ने मजबूत बनाया, हर ठोकर ने सोच को और स्पष्ट किया।

“जो टूटकर भी खड़ा हो जाए,
वही वास्तव में अपराजेय होता है।”

दिखावे की जगह खामोशी को चुना गया। बिना किसी अपेक्षा, बिना किसी सहारे के, अकेले चलकर अपने लिए रास्ता बनाया गया। मंज़िल तक पहुँचने की कोई जल्दबाज़ी नहीं थी—बस हर कदम में ईमानदारी, धैर्य और अटूट विश्वास था।

“खामोश मेहनत का शोर
एक दिन पूरी दुनिया सुनती है।”

यह प्रोफाइल उस नारी शक्ति की कहानी है,
जो शब्दों से नहीं, कर्म से बोलती है—
जो गिरकर भी रुकती नहीं,
जो खेल में भी शुद्ध रहती है,
जो साधना में भी मानवता खोजती है,
और अकेले चलकर भी इतिहास रचती है।

“रास्ते खुद बनते हैं,
जब इरादे पत्थर जैसे हों।”

Related posts

Foreign Diplomats Visit Bihar under “Know BJP” Initiative

oasisadmin

बरेली हिंसा पर भड़क गया कट्टर हिंदू शेर वीडियो जमकर हो रही वायरल योगी को क्या बोला

oasisadmin

DAZZLE | Area D4 Toastmasters Conference | District 124 | Major General Rajan Kochhar ji

oasisadmin

Leave a Comment