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नारायण सरकार हरी बाबा कैसे जुड़े थे पेपर लीक मामले से दरबार में ऐसा क्या होता था

दौसा. उत्तर प्रदेश के हाथरस में मंगलवार को सत्संग के बाद मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे के बाद अपने आप को भगवान का अवतार बताने वाले भोले बाबा उर्फ नारायण साकार हरि बाबा का राजस्थान कनेक्शन भी सामने आया है. राजस्थान से भी बड़ी संख्या में अनुयाई नारायण साकार हरि बाबा से जुड़े हुए थे और वे दौसा में कई बार दरबार लगते थे.

 

दौसा शहर के गोविंद देव जी मंदिर के पास एक मकान में बाबा ने अपना आश्रम बना रखा था. महीने में चार बार यहां पर दरबार लगाता था. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पर आते थे. यह दरबार पेपर लीक माफिया हर्षवर्धन के मकान में लगता था. फरवरी माह में जब एसओजी ने हर्षवर्धन के ठिकानों पर दबिश दी तो दौसा के इस आवास पर भी दबिश दी गई थी, जहां बाबा का दरबार मिला. हालांकि एसओजी की दबिश के बाद यहां भोले बाबा का दरबार नहीं लगा और तभी से इस मकान को सीज कर रखा है.

गौरतलब है कि पेपर लीक प्रकरण का आरोपी हर्षवर्धन इसी दरबार की आड़ में पेपर लिखकर रैकेट चलाता था. एसओजी की रेड के बाद बाबा ने यहां कोई दरबार नहीं लगाया है. यह मकान बंद है. हालांकि यहां अभी टेंट लगे हुए हैं. बाहर एक बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था ‘बाबा अभी निज प्रवास पर हैं.’

कॉलोनी वाले लोग यह बताते हैं कि इस आश्रम में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी. केवल बाबा यहां महीने में चार बार दरबार लगाते थे और उनके अनुयाई उत्तर प्रदेश से यहां आते थे. आश्रम के बाहर उनकी अलग से सिक्योरिटी फोर्स कड़ा पहरा देती थी. केवल हर्षवर्धन का यहां आना-जाना था. जब नारायण हरि बाबा यहां दरबार लगाते थे तो उनके प्राइवेट गार्ड आश्रम के आसपास और पूरे रास्ते में तैनात रहते थे जिसके कारण कॉलोनी वासियों को भी काफी परेशानी होती थी.

एसओजी ने जब यहां दबिश दी और इस आश्रम को सीज किया तब से कॉलोनीवासी भी काफी खुश हैं क्योंकि यहां किसी भी प्रकार के अनधिकृत लोगों की आवाजाही नहीं है. फरवरी माह में जब एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र मीणा के नेतृत्व में इस आश्रम में दबिश दी गई थी तो 4 घंटे तक सर्च अभियान चला था. एसओजी को इस आवास से विभिन्न परीक्षाओं की आंसर शीट और कई डॉक्यूमेंट मिले थे. नारायण हरि बाबा ने दौसा के कांदोली के समीप गत नवंबर माह में एक बड़ा प्रवचन का कार्यक्रम रखा था और इस कार्यक्रम में भी हाथरस की तरह भी भीड़ उमड़ी थी.

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