# दिल्ली के मलाई मंदिर में ऐतिहासिक महाकुंभाभिषेकम् संपन्न, जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य के सान्निध्य में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
चेन्नई से पहुंचे डॉ. ए. अंगप्पन अरुण ने धार्मिक अनुष्ठानों में लिया भाग, सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश
रिपोर्ट : सुषमा
नई दिल्ली | 05 जुलाई 2026 | रविवार | 08:44 PM
नई दिल्ली के आर.के. पुरम स्थित प्रसिद्ध उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर में रविवार को आयोजित महाकुंभाभिषेकम् श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं के अद्भुत संगम का साक्षी बना। देशभर से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति तथा जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य के दिव्य सान्निध्य ने इस धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक महोत्सव बना दिया। मंदिर परिसर में पूरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तिमय वातावरण बना रहा।
यह आयोजन केवल मंदिर के जीर्णोद्धार अथवा धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी नई ऊर्जा प्रदान करता दिखाई दिया।
वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ पवित्र महाकुंभाभिषेकम्
महाकुंभाभिषेकम् से पूर्व कई दिनों तक मंदिर परिसर में यज्ञ, होमम्, वेद पारायण, गणपति पूजन, विशेष अभिषेक, कलश स्थापना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। निर्धारित शुभ मुहूर्त में वैदिक विद्वानों एवं आचार्यों ने मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के पवित्र कलशों पर अभिषेक सम्पन्न कराया।
शंखनाद, वैदिक ऋचाओं और घंटियों की मधुर ध्वनि से संपूर्ण मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री स्वामीनाथ (भगवान मुरुगन) के दर्शन कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।
जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य ने दिया सनातन धर्म के संरक्षण का संदेश
इस पावन अवसर पर कांची कामकोटि पीठ के पूज्य जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन धर्म, वैदिक संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कार, सेवा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता के प्रमुख केंद्र हैं। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान भी किया।
पूरे दिन श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
चेन्नई से पहुंचे डॉ. ए. अंगप्पन अरुण ने लिया धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भाग
इस राष्ट्रीय धार्मिक आयोजन में चेन्नई से विशेष रूप से पहुंचे डॉ. ए. अंगप्पन अरुण ने भी महाकुंभाभिषेकम् के विभिन्न वैदिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।
डॉ. अंगप्पन अरुण वर्तमान में CEO – Devar Group of Companies, State Secretary – Legal Awareness Association तथा National Deputy Secretary – All India Youth Development Association के रूप में विभिन्न सामाजिक एवं राष्ट्रीय गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले डॉ. अंगप्पन अरुण ने जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राज्यों के सामाजिक प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की सहभागिता से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन की रही उत्कृष्ट व्यवस्था
महाकुंभाभिषेकम् के दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल, प्रसाद वितरण, पार्किंग तथा स्वयंसेवकों की विशेष टीम पूरे आयोजन के दौरान सक्रिय रही।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद पूरा आयोजन अनुशासित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ। महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्र की समृद्धि और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना की।
उत्तर भारत में भगवान मुरुगन की आस्था का प्रमुख केंद्र है मलाई मंदिर
नई दिल्ली का उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर उत्तर भारत में भगवान मुरुगन (श्री स्वामीनाथ) के प्रमुख एवं प्रतिष्ठित मंदिरों में गिना जाता है। दक्षिण भारतीय वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति का यह महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है।
महाकुंभाभिषेकम् जैसे भव्य धार्मिक आयोजन भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस वर्ष आयोजित समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सनातन परंपराएं आज भी समाज को जोड़ने और आध्यात्मिक मूल्यों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली के प्रसिद्ध उत्तरा स्वामी मलाई मंदिर में आयोजित महाकुंभाभिषेकम् केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा, आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रीय एकता का भव्य उत्सव बनकर सामने आया। जगद्गुरु श्री शंकर विजयेन्द्र सरस्वती शंकराचार्य के सान्निध्य, हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता तथा देशभर से पहुंचे सामाजिक प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. ए. अंगप्पन अरुण भी शामिल रहे, ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व प्रदान किया।
Report By : Sushma
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