रांचीः झारखंड के चतरा में 23 फरवरी को हुए एयर एंबुलेंस हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। जांच रिपोर्ट में हादसे के लिए फिलहाल किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है । एएआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाइट में ब्लैक बॉक्स नहीं था। तकनीकि भाषा में सीवीआर (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर) और एफडीआर (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) कहते हैं । ब्लैक बॉक्स नहीं होने की वजह से हादसे के वक्त विमान के अंदर और बाहर की स्थिति क्या थी ये पता लगाना बहुत मुश्किल था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त एयर एंबुलेंस में सीवीआर और एफडीआर दोनों मौजूद नहीं थे। यह विमान एक छोटा टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट था, जिसमें कई मामलों में ब्लैक बॉक्स अनिवार्य नहीं होता। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत छूट मिली हुई थी लेकिन सवाल उठता है-क्या ऐसे विमानों में भी अब इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए?
दुर्घटना के समय ईएलटी सक्रिय नहीं हुआ
जांच में यह भी सामने आया है कि विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) दुर्घटना के समय सक्रिय नहीं हुआ। इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक मरीज और उसके दो अटेंडेंट भी शामिल थे। इस वजह से दुर्घटनास्थल का पता लगाने में देरी हुई और प्रशासन को स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मलबे तक पहुंचना पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस विमान का अंतिम निरीक्षण 20 जनवरी 2026 को ही किया गया था। यानी हादसे से करीब एक महीना पहले ही विमान की जांच हुई थी, फिर भी 23 फरवरी को यह दर्दनाक हादसा हो गया।

