फ्रांस में G7 विदेश मंत्रियों की बैठक: यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट पर वैश्विक रणनीति पर मंथन
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत G7 देशों ने सुरक्षा, ऊर्जा और कूटनीतिक समाधान पर की अहम चर्चा
तारीख: 25 मार्च 2026
स्थान: पेरिस, फ्रांस
रिपोर्ट: सुषमा | विशेष संवाददाता
समाचार रिपोर्ट
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित G7 देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित G7 देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन को जारी युद्ध में सहयोग देने के साथ-साथ मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक समाधान तलाशना था। G7 देशों ने एकजुट होकर अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यूक्रेन युद्ध पर क्या हुई चर्चा
बैठक में रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा करने तथा यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता जारी रखने पर विचार किया गया। G7 देशों ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा उनके लिए प्राथमिकता बनी रहेगी।
मध्य-पूर्व संकट पर चिंता
मध्य-पूर्व में हालिया घटनाओं और क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ते खतरे पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। नेताओं ने कहा कि यदि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा भी रही प्रमुख मुद्दा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। G7 देशों ने तेल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में संयुक्त रूप से कदम उठाने की संभावना जताई, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।
G7 देश कौन-कौन हैं
G7 समूह में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। ये देश विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियां माने जाते हैं और वैश्विक नीतियों पर इनका बड़ा प्रभाव होता है।
बैठक क्यों है महत्वपूर्ण
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया के दो बड़े क्षेत्र—पूर्वी यूरोप और मध्य-पूर्व—एक साथ युद्ध और तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं। ऐसे में G7 की सामूहिक रणनीति वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय कर सकती है।
संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद:
- यूक्रेन को अतिरिक्त सहायता पैकेज की घोषणा हो सकती है
- मध्य-पूर्व संकट पर संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए समन्वित कदम उठाए जा सकते हैं

