आरक्षण तय होने के बाद महिला नेतृत्व तय, नाम को लेकर सियासी हलचल तेज
मुंबई।
देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर बड़ी तस्वीर साफ हो गई है। आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद यह तय हो चुका है कि इस बार BMC मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित रहेगा। ऐसे में अब यह लगभग तय है कि मुंबई नगर निगम की कमान एक महिला के हाथों में होगी।
महिला नेतृत्व तय, लेकिन नाम अभी खुला सवाल
आरक्षण तय होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख दलों ने अपने-अपने संभावित महिला चेहरों पर मंथन शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर मेयर पद के लिए नाम की घोषणा नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक, अनुभवी महिला पार्षदों, संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाली नेताओं और प्रशासनिक समझ रखने वाली महिलाओं के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश में है जो मुंबई जैसे महानगर के प्रशासन को संभालने के साथ-साथ राजनीतिक संतुलन भी बनाए रख सके।
क्यों अहम है BMC मेयर का पद?
BMC न सिर्फ देश की सबसे बड़ी बल्कि सबसे ज्यादा बजट वाली नगर निगम है। मेयर का पद भले ही औपचारिक माना जाता हो, लेकिन इसका राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व बेहद बड़ा है। ऐसे में महिला मेयर का चुना जाना महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
आगे क्या?
-
नगर निगम चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद तस्वीर और साफ होगी
-
पार्टियां अपने आधिकारिक प्रत्याशी के नाम का ऐलान करेंगी
-
महिला नेतृत्व को लेकर मुंबई की राजनीति में नया अध्याय शुरू होने की संभावना
निष्कर्ष
आरक्षण के साथ यह तय हो चुका है कि BMC की अगली मेयर महिला होंगी, लेकिन वह महिला कौन होंगी—इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है। आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों के साथ यह नाम भी सामने आ जाएगा।

