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49वें चेन्नई पुस्तक मेले का भव्य आयोजन, साहित्य और संस्कृति का संगम

49वें चेन्नई पुस्तक मेले का भव्य आयोजन, साहित्य और संस्कृति का संगम

अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक और फिल्मी जगत की प्रमुख हस्तियों ने बढ़ाई शोभा

चेन्नई।
साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श को समर्पित 49वां चेन्नई पुस्तक मेला अत्यंत भव्य और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश-विदेश की कई विशिष्ट हस्तियों ने भाग लेकर पुस्तकों के महत्व, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विचारों की स्वतंत्रता पर अपने विचार साझा किए।


मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाले प्रमुख अतिथियों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सामाजिक नेतृत्व और सिनेमा जगत से जुड़ी नामचीन हस्तियां शामिल रहीं।

DR. USSR G. Natarajan

Consul General – USSR Consulate
Secretary – Indo-Russian Cultural & Friendship Society
Senior Vice President – NUBC, New Delhi

DR. USSR G. Natarajan ने अपने संबोधन में भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों, साहित्यिक सहयोग और वैश्विक शांति में पुस्तकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले विचारों को जोड़ने और सभ्यताओं को समझने का सशक्त माध्यम हैं।


डॉ. ए. अंगप्पन @ अरुण का प्रेरणादायी संबोधन

MSc, MPhil., PhD., LLB., PGDCA 

मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) – देवर ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़

राज्य सचिव – विधिक जागरूकता संघ
राष्ट्रीय उप-सचिव – अखिल भारतीय युवा विकास संघ

डॉ. ए. अंगप्पन @ अरुण ने युवाओं में पढ़ने की संस्कृति, कानूनी जागरूकता और राष्ट्रनिर्माण में साहित्य की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम हैं।

एक प्रखर सनातन विचारधारा के युवा नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने नैतिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और राष्ट्रवादी चिंतन को मजबूत करने में पुस्तकों के महत्व को रेखांकित किया। उनके विचारों को उपस्थित श्रोताओं ने अत्यंत सराहा।


फिल्म और साहित्य के संबंध पर T. Antony के विचार

T. Antony
अभिनेता एवं निर्माता
Edison Paradise Productions

प्रसिद्ध अभिनेता और निर्माता टी. एंटनी ने कहा कि साहित्य और सिनेमा एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण साहित्य को सार्थक सिनेमा की आत्मा बताया और युवाओं से किताबों से जुड़ने का आह्वान किया।


साहित्य प्रेमियों में दिखा विशेष उत्साह

49वें चेन्नई पुस्तक मेले में विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों, लेखकों से संवाद, साहित्यिक चर्चाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पाठकों को आकर्षित किया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, युवाओं और साहित्य प्रेमियों की सहभागिता ने आयोजन को सफल बनाया।


ज्ञान, संवाद और संस्कृति का सशक्त मंच

चेन्नई पुस्तक मेला एक बार फिर यह सिद्ध करने में सफल रहा कि पुस्तकें समाज को जोड़ने, सोच को समृद्ध करने और भविष्य को दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
यह आयोजन न केवल साहित्यिक उत्सव रहा, बल्कि सांस्कृतिक एकता और बौद्धिक चेतना का जीवंत प्रतीक भी बना।

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