जेपी नड्डा का 6 साल: कहीं कड़वे चुनावी झटके, कहीं मीठी ऐतिहासिक जीत
20 जनवरी 2026 को अध्यक्ष पद से विदाई, नितिन नबीन को सौंपेंगे कमान
नई दिल्ली | राजनीतिक डेस्क
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। इसी दिन वे पार्टी की कमान नितिन नबीन को सौंप देंगे। करीब छह साल लंबे कार्यकाल में नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने बड़ी चुनावी जीतों का स्वाद भी चखा और कुछ अहम मौकों पर हार का सामना भी किया। यही कारण है कि उनके कार्यकाल को पार्टी में ‘कभी नीम तो कभी शहद’ जैसा माना जा रहा है।
तीन बड़ी जिम्मेदारियां एक साथ निभा रहे हैं नड्डा
जेपी नड्डा फिलहाल एक साथ तीन अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ-साथ केंद्र सरकार में दो बड़े विभागों के कैबिनेट मंत्री हैं और राज्यसभा में सदन के नेता भी हैं। यह स्थिति पार्टी और सरकार दोनों में उनके मजबूत कद को दर्शाती है।
तीन साल का कार्यकाल, लेकिन पूरे हुए छह साल
नड्डा का मूल कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन पहले कोविड-19 महामारी और फिर लोकसभा चुनाव के चलते इसे बढ़ाया गया। इस तरह जनवरी 2020 में शुरू हुआ उनका अध्यक्षीय कार्यकाल पूरे छह साल तक चला। इस दौरान बीजेपी उनकी अगुवाई में एक लोकसभा और 33 विधानसभा चुनावों में उतरी।
अध्यक्ष बनने तक का सफर
वैसे तो जेपी नड्डा 2014 में ही बीजेपी अध्यक्ष बन सकते थे, लेकिन उस समय उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले अमित शाह को यह जिम्मेदारी दी गई। नड्डा शाह की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बने।
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया, जहां बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद अमित शाह के गृह मंत्री बनने पर जून 2019 में नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अंततः 20 जनवरी 2020 को वे औपचारिक रूप से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
33 विधानसभा चुनाव, 60 प्रतिशत सफलता
जेपी नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने 2020 से अब तक 33 विधानसभा चुनाव लड़े। इनमें से 19 चुनावों में पार्टी को जीत मिली। इस तरह उनकी अगुवाई में बीजेपी की सफलता दर लगभग 60 प्रतिशत रही।
कार्यकारी अध्यक्ष के दौर की चुनौतियां
कार्यकारी अध्यक्ष रहते हुए नड्डा ने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों के चुनाव संभाले।
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झारखंड में पार्टी को हार मिली।
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हरियाणा में सीटें घटीं और सहयोगियों के साथ सरकार बनानी पड़ी।
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महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बना, लेकिन गठबंधन विवादों के कारण सरकार गिर गई।
अध्यक्ष बनने के बाद पहला झटका
जनवरी 2020 में अध्यक्ष बनने के बाद नड्डा का पहला बड़ा चुनाव दिल्ली विधानसभा चुनाव था, जिसमें बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके बाद 2020 के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर पार्टी ने मजबूत वापसी की।
2021–22: जीत और हार का मिला-जुला दौर
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2021 में बीजेपी ने असम और पुडुचेरी में जीत दर्ज की।
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पश्चिम बंगाल में सीटें बढ़ीं, लेकिन सत्ता से दूरी बनी रही।
2022 बीजेपी के लिए बेहद अहम रहा। पार्टी ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा जैसे बड़े राज्यों में जीत हासिल की। हालांकि नड्डा के गृह राज्य हिमाचल प्रदेश में हार और पंजाब में कमजोर प्रदर्शन पार्टी के लिए निराशाजनक रहा।
2023–24: हिंदी पट्टी में वापसी, लोकसभा में झटका
2023 में बीजेपी ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जीत दर्ज कर हिंदी पट्टी में अपना दबदबा कायम रखा। लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस से हार पार्टी के लिए बड़ा झटका रही।
2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटों में उल्लेखनीय कमी आई और पार्टी बहुमत से दूर रह गई। हालांकि इसी दौरान बीजेपी ने ओडिशा में बीजद से सत्ता छीनकर राज्य में पहली बार सरकार बनाई, लेकिन लोकसभा नतीजों के कारण यह उपलब्धि फीकी पड़ गई।
जम्मू-कश्मीर और बाद की चुनावी वापसी
अनुच्छेद 370 हटने के बाद हुए पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने
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वोट शेयर 22% से बढ़ाकर 25% से अधिक किया
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सीटें 25 से बढ़कर 29 कर लीं
हालांकि सत्ता में वापसी नहीं हो सकी। इसके बाद 2024 के दूसरे हिस्से में महाराष्ट्र और हरियाणा में जीत ने पार्टी की स्थिति फिर मजबूत की।
2025 में दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर बीजेपी एक बार फिर मजबूत चुनावी मशीन के रूप में उभरी।
सरकार और संगठन के बीच मजबूत सेतु
जेपी नड्डा पूरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भरोसेमंद सहयोगी बने रहे। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर सराहा जाता है।
मोदी सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं को संगठन के जरिए ज़मीनी स्तर तक पहुंचाना, लाभार्थियों से सीधा संपर्क बनाना और बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाए रखना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।
कोविड काल में भी नड्डा के नेतृत्व में पार्टी संगठन ने गरीबों तक राशन और जरूरी सहायता पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
निष्कर्ष
जेपी नड्डा का छह साल का कार्यकाल बीजेपी के लिए उपलब्धियों और चुनौतियों का संतुलित मिश्रण रहा। जहां एक ओर ऐतिहासिक जीतें रहीं, वहीं कुछ बड़े चुनावी झटके भी लगे। इसके बावजूद संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए नड्डा ने बीजेपी को लगातार चुनावी मैदान में सक्रिय और प्रभावी बनाए रखा।
20 जनवरी 2026 को उनकी विदाई के साथ बीजेपी संगठन में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।

