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150 वर्ष वंदे मातरम्” की थीम में दिखा राष्ट्रगौरव

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाया अंतरराष्ट्रीय महत्व

नई दिल्ली | 26 जनवरी 2026

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को इस वर्ष एक विशिष्ट राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिली। समारोह की थीम “वंदे मातरम् – 150 वर्ष” रखी गई, जो राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर को समर्पित है। यह थीम भारत की स्वतंत्रता चेतना, राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है।


🎶 वंदे मातरम् : स्वतंत्रता से विकसित भारत तक की यात्रा

इस वर्ष की थीम के माध्यम से भारत ने न केवल अपने स्वतंत्रता संग्राम को स्मरण किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करते हैं
परेड, झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में वंदे मातरम् की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी — जहाँ परंपरा और आधुनिक भारत का सुंदर संगम नजर आया।


🌍 मुख्य अतिथि: भारत-यूरोप साझेदारी की मजबूत झलक

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहा।

  • एंटोनियो कोस्टा, अध्यक्ष – यूरोपीय परिषद

  • उर्सुला वॉन डेर लेन, अध्यक्ष – यूरोपीय आयोग

इन दोनों नेताओं की संयुक्त उपस्थिति ने समारोह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व प्रदान किया। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है।


🤝 कूटनीतिक संदेश और वैश्विक संकेत

मुख्य अतिथियों की मौजूदगी को भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका और अंतरराष्ट्रीय विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
यह संकेत देता है कि भारत न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र है, बल्कि विश्व मंच पर एक निर्णायक और भरोसेमंद भागीदार भी बन चुका है।


✨ समारोह का व्यापक संदेश

  • वंदे मातरम्: राष्ट्रीय चेतना और एकता का प्रतीक

  • यूरोपीय संघ की भागीदारी: वैश्विक सहयोग की मजबूती

  • गणतंत्र दिवस 2026: परंपरा, प्रगति और भविष्य का संगम


🇮🇳 निष्कर्ष

गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन केवल एक औपचारिक समारोह नहीं रहा, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक विरासत, आधुनिक शक्ति और वैश्विक दृष्टि का प्रभावशाली प्रदर्शन बना।
वंदे मातरम् – 150 वर्ष” की थीम और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने इस अवसर को राष्ट्रीय गर्व और अंतरराष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक बना दिया।

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