वैश्विक मंच पर भारत–NATO की गूंज
भारत और NATO के बीच संभावित ऐतिहासिक समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इस बीच भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो एनरिको बार्टोली ने हाल ही में दुनिया के बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा है भारत–NATO समझौता?
इटली के राजदूत के अनुसार, भारत और NATO के बीच होने वाली यह डील केवल एक ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है, बल्कि यह
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रणनीतिक साझेदारी,
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रक्षा और तकनीक सहयोग,
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वैश्विक सप्लाई चेन,
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और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता
से जुड़ी हुई है।
इसी व्यापक प्रभाव के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।
भारत की भूमिका पर क्या बोले इटली के राजदूत?
एंटोनियो बार्टोली ने कहा कि भारत आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभरा है।
उनके मुताबिक, भारत के बिना अब किसी भी बड़े वैश्विक सुरक्षा या व्यापारिक ढांचे की कल्पना अधूरी है।
ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर राजदूत की टिप्पणी
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर बोलते हुए इटली के राजदूत ने संकेत दिया कि
“अत्यधिक और असंतुलित टैरिफ नीतियां वैश्विक व्यापार के लिए नुकसानदायक साबित होती हैं।”
उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद से सहयोग कमजोर होता है और इसका असर सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
NATO का भविष्य: सिर्फ सैन्य संगठन नहीं
राजदूत बार्टोली ने NATO के भविष्य को लेकर कहा कि आने वाले समय में NATO केवल एक सैन्य गठबंधन तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने बताया कि NATO अब:
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आर्थिक सहयोग,
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तकनीकी साझेदारी,
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लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा,
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और एशिया–प्रशांत क्षेत्र में सहयोग
पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, जहां भारत की भूमिका बेहद अहम होगी।
भारत–यूरोप संबंधों को मिलेगा नया आयाम
इटली के राजदूत ने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय देशों के रिश्ते भविष्य में और मज़बूत होंगे। भारत को उन्होंने स्थिरता, भरोसे और विकास का प्रतीक बताया।
निष्कर्ष
इटली के राजदूत एंटोनियो एनरिको बार्टोली के बयान साफ संकेत देते हैं कि भारत–NATO के बीच प्रस्तावित यह डील केवल एक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम हो सकती है। आने वाले दिनों में इस पर पूरी दुनिया की नज़र बनी रहेगी।

