📰 ग्रीनलैंड संकट: 6 देशों के 187 सैनिक और अमेरिका-यूरोप तनाव —
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है, एक बार फिर वैश्विक राजनीति और तस्करण सुरक्षा मुद्दों के केंद्र में आ गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महत्वपूर्ण आर्कटिक द्वीप को अमेरिका का हिस्सा बनाने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है, जिससे नाटो और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
🔥 क्या है मुख्य विवाद?
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डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए “आवश्यक” बताते हुए अपना नियंत्रण हासिल करने का प्रयास किया है। इसके लिए उन्होंने आर्थिक दबाव और टैरिफ की धमकियाँ दी हैं कि यदि अन्य देश समर्थन नहीं देंगे तो उन पर भारी आयात शुल्क लगाए जा सकते हैं।
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डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी तरह के अमेरिकी अधिग्रहण को “कभी स्वीकार नहीं करेंगे,” और डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि इस तरह का कदम नाटो को तोड़ सकता है।
🇪🇺 6 देशों ने ग्रीनलैंड में सैनिक क्यों भेजे?
ट्रंप के बयान और संभावित दबाव के बीच यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। एक संयुक्त सैन्य अभ्यास “Operation Arctic Endurance” के तहत डेनमार्क की अगुवाई में ग्रीनलैंड में सैनिक तैनात हो रहे हैं।
इन सैनिकों का लक्ष्य:
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ग्रीनलैंड की सैन्य मौजूदगी बढ़ाना।
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नाटो सहयोग को मजबूत करना और यह संदेश देना कि अमेरिका अकेला नहीं है।
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क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना।
पूरे अभियान में लगभग 187 से अधिक सैनिक तैनात किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
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फ्रांस: लगभग 15 सैनिक
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जर्मनी: करीब 13 सैनिक
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स्वीडन, नॉर्वे, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स के भी जवान शामिल होने की पुष्टि हुई है।
(कुल मिलाकर 6 देशों से लगभग 187 सैन्य कर्मी साझा मिशन में भाग ले रहे हैं — संख्या विभिन्न रिपोर्टों में दी गई यह जानकारी आधार है).
🪖 क्या यह अमेरिका से मुकाबला है?
इन सैनिकों का लक्ष्य अमेरिका को सैन्य रूप से हराना नहीं है। बल्कि यह एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक समर्थन मिशन है, ताकि:
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ग्रीनलैंड की संप्रभुता को बनाए रखा जा सके।
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आर्कटिक में नाटो की उपस्थिति मजबूत दिखे।
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अमेरिका को यह संदेश जाए कि नाटो सदस्य सहमत प्रक्रिया के बिना किसी क्षेत्रीय बदलाव को स्वीकार नहीं करेंगे।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
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रूस ने ट्रंप की धमकियों को “असाधारण” बताया है और स्थिति पर नजर रखने की बात कही है।
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नाटो के भीतर भी मतभेद उभर रहे हैं, कुछ देशों ने अमेरिका के दृष्टिकोण का समर्थन किया तो कुछ इसका विरोध किया है।
📌 स्थिति का सार
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ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक टकराव बढ़ रहा है।
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यूरोपीय देशों ने मिलकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए सैनिक भेजकर एकजुटता दिखाई है।
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यह एक राजनीतिक संदेश मिशन है न कि सीधा युद्ध या मुकाबला।

